कहते हैं कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है वैसे ही हमारे ज्ञान और बुद्धि का विकास होता चला जाता है। साथ ही इसी बढ़ती उम्र में हमें यह भ्रम भी हो जाता है कि ‘मैं जो कर रहा हूँ वही सही है’।
इसके उलट जब कोई आपकी गलती बताये और उसे सही करने का प्रयास करे तब आपको उनकी सही बात भी गलत लगने लगती है, इसलिये ज्ञान में वृद्धि करने के साथ सही और गलत के अंतर को समझना जरूरी है जो आपके कार्य को अंततः सही दिशा में लेकर जाए।










