रायपुर। बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुरूप कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए जगदलपुर और दंतेवाड़ा में वृहद दिव्यांग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविरों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा और विशेष रूप से आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवा चुके नागरिकों के पुनर्वास के लिए यह अभियान मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य आईईडी पीड़ित दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आसान बनाना है। इसके साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र का कोई भी पात्र हितग्राही इस अभियान के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने को कहा गया है। सूची में आईईडी विस्फोट से प्रभावित दिव्यांगजनों का अलग से विवरण शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिविरों में आर्टिफिशियल लिंब, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। जिन पात्र हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग की ओर से शिविर स्थल पर ही प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इन शिविरों का आयोजन सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को प्रेस वार्ता, सोशल मीडिया और स्थानीय इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक भी इसकी जानकारी पहुंच सके।
शिविरों में आने वाले दिव्यांगजनों की सहायता के लिए स्काउट-गाइड के स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा निःशुल्क परिवहन, भोजन और पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। भविष्य की कार्ययोजना के तहत ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा सत्यापन कर उन्हें आईईडी-मुक्त ग्राम घोषित करने की दिशा में भी तेजी लाने पर जोर दिया गया है।
कमिश्नर डोमन सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान शिविरों की विस्तृत प्रशासनिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। बैठक में संभाग के आईजी, सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा स्वास्थ्य और नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
जगदलपुर में पहला तीन दिवसीय शिविर 5 से 7 अक्टूबर तक क्रीड़ा परिसर में आयोजित किया जाएगा। 5 अक्टूबर को बस्तर, 6 अक्टूबर को नारायणपुर और कोंडागांव तथा 7 अक्टूबर को कांकेर जिले के चयनित हितग्राही शिविर में शामिल होंगे। जगदलपुर शिविर के लिए कुल 2,953 हितग्राहियों को चिह्नित किया गया है।
इसके बाद 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में शिविर लगाया जाएगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के कुल 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। दोनों शिविरों की गतिविधियां प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शुरू होंगी।
शिविर में आने वाले प्रत्येक दिव्यांगजन के लिए संबंधित जिला प्रशासन की ओर से निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। हितग्राहियों को पहचान के लिए आधार कार्ड की प्रति जैसे पहचान प्रमाण और दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे।
जयपुर से आने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम शिविर में नए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी। शिविर स्थल पर छाया, शुद्ध पेयजल, शौचालय, निर्बाध बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा की व्यवस्था भी की जाएगी।
व्यवस्थाओं की निगरानी और सुचारू संचालन के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने धरमपुरा में आयोजित होने वाले शिविर की तैयारियों की जानकारी दी। इसमें बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर के लाभार्थी शामिल होंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।









