थोड़ा भी कष्ट होने के हम विचलित हो जाते हैं। यह हमारे परीक्षा की घड़ी ही है जिसमे हमें खड़े रहना एक बड़ी चुनौती होती है। अगर इस समान हम अपने आप को संभाल लिए तो उस जगह से ही हमारे सुख का रास्ता खुलने लगाया है।
जब तक कठिन समय ना तो जीवन में तब तक हमें सुख की अनुभूति भी नही होती है। सुख और परीक्षा जीवन के वो सिक्के हैं, जिनसे कभी भी छुटकारा नही पाया जा सकता। इस लिए इस समय को स्वीकारना ही बेहतर होगा।









