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क्रोध करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है फिर भ्रम से बुद्धि कार्य करना बंद कर देता है और जब बुद्धि कार्य करना बंद करती है तो तर्क शक्ति नष्ट हो जाती है और जब तर्क शक्ति नष्ट होता है तब उस व्यक्ति का पतन निश्चित है..
जिस प्रकार कपड़े फटने या पुराने होने पर लोग उसका त्याग कर देते है और नये वस्त्र धारण करते है ठीक उसी प्रकार आत्मा भी पुराने शरीर को छोडकर नये शरीर धारण करती है यही प्रकृति का जीवन चक्र है जो लगातार चलता रहता है.










