कलह पर विजय पाने के लिए मौन से बड़ा कोई भी शास्त्र नहीं है। कभी-कभी चुप रहने में ही भलाई होती है और वह चुप्पी हमारा इतना बड़ा अस्त्र बन जाती है कि बिना किसी घाव के सामने वाले को छलनी छलनी कर देती है।
जब हम किसी भी बात का विरोध चिल्ला कर नहीं करते हैं तो वैसे ही हमारी आधी विजय हो जाती है। सामने वाले को समझा जाता है कि उससे क्या गलती हुई है और अंदर ही अंदर वह उसका पश्चाताप करने लगता है। यही शांति की विजय कहलाती है।










