सागर को घमंड था की मैं, सारी दुनिया को डुबा सकता हूँ।
इतने में तेल की एक बूद आयी, और तैर कर निकल गई।।
यदि आप किसी मकसद के लिए खड़े हो, तो वृक्ष की तरह रहो।
और गिरो तो बीज की तरह, जिससे पुनः उगकर उस मकसद को पूरा कर सको।।
व्यक्ति का सम्मान उन शब्दों से होता है, जो शब्द उनकी अनुपस्थिति में कहा जाए।
व्यक्ति में हिम्मत न हो, तो प्रतिष्ठा नहीं।
यदि विरोधी न हो तो व्यक्ति के जीवन में प्रगति नहीं।। कई बार नकारात्मकता ही हमारी प्रेरणा स्त्रोत बन जाती है।










