रायपुर, 26 नवंबर: उच्चतम न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में ईवीएम के स्थान पर मतपत्र से मतदान कराने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और पी. बी. वराले की पीठ ने दिया।
याचिका डॉ. के. ए. पॉल ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि लोकतांत्रिक देशों में मतपत्र से मतदान की व्यवस्था है और भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए। इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने चुटकी लेते हुए कहा, “क्या आप नहीं चाहते कि भारत बाकी दुनिया से अलग हो?”
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ईवीएम लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और इनके साथ छेड़छाड़ हो सकती है। उन्होंने एलन मस्क समेत कई प्रमुख व्यक्तियों की टिप्पणियों और चंद्रबाबू नायडू व जगन मोहन रेड्डी के ट्वीट्स का हवाला दिया।
इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की, “जब आप चुनाव जीतते हैं तो ईवीएम सही होती है, लेकिन जब हारते हैं तो छेड़छाड़ का आरोप लगाते हैं।”
न्यायालय ने याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।










