रायपुर।सावन से पहले आने वाला आषाढ़ माह बारिश की शुरुआत का समय होता है, जब मौसम में नमी बढ़ने के साथ शरीर की पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान खानपान में विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, ताकि बीमारियों से बचा जा सके और शरीर संतुलित बना रहे।
क्या न खाएं (परहेज करें):
आषाढ़ माह में भारी, तैलीय और देर से पचने वाले भोजन से बचना चाहिए। खासकर दही, बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, अधिक मसालेदार और तला-भुना खाना नहीं लेना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार इस समय कफ और वात दोष बढ़ते हैं, इसलिए ठंडे और बासी भोजन से भी दूरी बनाना जरूरी है। सड़क किनारे खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं, इसलिए इनसे भी परहेज करें।
क्या खाएं (अनुसरण करें):
इस मौसम में हल्का, सुपाच्य और गर्म भोजन लेना सबसे बेहतर माना जाता है। मूंग दाल, दलिया, खिचड़ी, सूप और ताजे फल शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन को भी मजबूत करते हैं। भोजन में अदरक, काली मिर्च, हींग और हल्दी जैसे मसालों का सीमित उपयोग पाचन को बेहतर बनाता है। उबला हुआ या गुनगुना पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
आयुर्वेदिक सुझाव:
विशेषज्ञों के अनुसार, आषाढ़ माह में नियमित दिनचर्या, समय पर भोजन और स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। योग और हल्का व्यायाम भी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
आयुर्वेद का मानना है कि मौसम के अनुसार खानपान और जीवनशैली अपनाकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। ऐसे में आषाढ़ माह में संतुलित आहार ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
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