पहाड़ों पर बैठ कर तप करना सरल है लेकिन समाज में परिवार में सबके बीच रहकर धीरज बनाये रखना कठिन है और यही तप है.परिवार एक पेड़ के समान है जिसमे रहने वाले लोगों की सोच पेड़ की शाखाओं के आकार प्रकार की तरह लोगों के विचार भी अलग हैं। इन अलग विचारधारा वाले लोगों के साथ में रहते हुए सामंजस्य बनाना और उन्हें अपने में रमने को मजबूर होने देना एक बड़ी कला है।










