हालत कहे जैसे भी हो हमेशा उसका सामना हिम्मत और हंस कर करना चाहिए। इससे वह खुद आपके अनुरूप होने लगेगी और हम जब हार कर उसके सामने घुटने टेक देंगे तो वह लंबे समय तक हमारी परीक्षा लेगी।
हमे परीक्षा से डरना नहीं चाहिए। जब तक आपकी प्रतिभा का परीक्षण नहीं होता तब तक यह अनुमान लगाना भी संभव नहीं होगा की आप कितने सक्षम हैं। आगे बढ़ने के लिए परीक्षा में शामिल होना और पास होना तभी संभव है जब उसमे शामिल हुआ जाए।









