जवानों के साथ चीन ने पार की क्रूरता की हदें, चेहरे भी पहचानना मुश्किल

गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से लड़ते हुए जो 20 भारतीय जवान शहीद हो गए उनके पार्थिव शरीर उनके घरों पर पहुंच गए हैं। इनमें से कुछ का अंतिम संस्कार हो गया है तथा कुछ का संस्कार अभी होना है। वहीं शवों की हालत देखकर देशवासियों का गुस्सा उफान पर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि भारतीय जवानों के शरीर पर गहरे घाव थे। कुछ की मौत हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान बेहद कम हो जाना) और दम घुटने से हुई। शरीर पर नुकीले हथियारों के निशान थे जिससे प्रतीत होता है कि चीनी सैनिकों ने नुकीली रॉड से भारतीय सैनिकों पर हमला किया।

ये निशान 15 से ज्यादा जवानों के शरीर पर मिले हैं। एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा लग रहा है जैसे हमारे जवानों को नाखून चुभोए गए हों। शुरुआती रिपोर्ट में पता चला है कि कर्नल संतोष बाबू समेत तीन अन्य भारतीय जवानों के शरीर पर जख्मों के निशान नहीं मिले हैं। अलबत्ता उनके सिर पर गहरे चोट के निशान पाए गए। अस्पताल और आर्मी बेस में मौजूद अधिकारियों को शवों की तस्वीर नहीं लेने का निर्देश दिया गया था।  एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि उनके चेहरों को पहचानना मुश्किल हो रहा था। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक कुछ जवानों की मौत नदी में गिरने से हुई जबकि कुछ की मौत दम घुटने के कारण बताई गई है। गलवान घाटी सतह समुद्र से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर है, जिसके चलते यहां का तापमान शून्य डिग्री के करीब होता है।

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