बंगाल में विधानसभा चुनाव से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांगेस के खेमे में भगदड मची हुई है। नतीजा यह है कि नाराज नेताओं के इस्तीफे का दौर जारी है। हाल ही में ममता सरकार के पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया था। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसमें भी चार मंत्री अनुपस्थित रहे। इसके कारण अब तृणमूल हाईकमान तनाव में आ गया है।
तृणमूल कांग्रेस के कई नेता पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे हैं, जिसमें से शुभेंदु समेत कुछ नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया। मंगलवार को ममता बनर्जी ने सचिवालय में कैबिनेट की बैठक बुलाई तो इसमें भी चार मंत्री नहीं पहुंचे। इसमें दो मंत्री, पर्यटन मंत्री गौतम देब और उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष थे। हालांकि दोनों की अनुपस्थिति को लेकर ममता और तृणमूल आश्वस्त हैं, क्योंकि कोरोना महामारी से किसी भी बैठक में दोनों हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
वहीं बीरभूमि से मत्स्य पालन मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा और हावड़ा से राजीब बनर्जी भी बैठक में नहीं आए। इनकी गैरमौजूदगी से राजनीतिक गलियारों में हलचल है, क्योंकि दोनों पार्टी से नाराज चल रहे। अटकलें है कि राजीव बनर्जी पक्षपात का आरोप लगाकर तृणमूल का साथ छोड़ सकते हैं। कुछ इसी तरह का मामला शुभेंदु अधिकारी के केस में हुआ था, उन्होंने भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने से पहले कैबिनेट बैठक से दूरी बना ली थी।
बंगाल सरकार में वन मंत्री और दोमजुर विधायक राजीव बनर्जी कुछ दिनों से बगावत के रास्ते पर चल रहे हैं। नवंबर में कोलकाता में एक रैली के दौरान, उन्होंने पार्टी में भाई-भतीजावाद और चाटुकारिता के बारे में बात करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में ‘यस मैन’ (हां में हां मिलाने वाले लोग) प्रमुखता से बढ़ रहे हैं और यह व्यक्तिगत निराशा का विषय है।
कैबिनेट बैठक से नदारद रहने वाले अन्य मंत्रियों में कूच बिहार के उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवींद्रनाथ घोष भी थे। घोष ने बैठक में शामिल नहीं होने की वजह ‘दुआरे अभियान’ में व्यस्त रहना बताया। दार्जिलिंग जिले से आने वाले पर्यटन मंत्री गौतम देब ने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वहीं, वीरभूम से आने वाले चंद्रनाथ सिन्हा ने कहा कि वह अगले हफ्ते ममता के दौरे की तैयारियों में व्यस्त थे।
तृणमूल में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की दखल बढ़ती जा रही है, जो कई नेताओं को पसंद भी नहीं है। इसके अलावा हाल ही में प्रशांत किशोर ने पार्टी में कई बड़े बदलाव किए, जिसमें वरिष्ठ नेताओं की राय नहीं ली गई। वहीं शुभेंदु की 64 विधानसभा सीटों पर पकड़ मजबूत है, वो चाहते थे, उन सीटों पर उनकी पसंद के उम्मीदवार उतारे जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। धीरे-धीरे पार्टी में गतिरोध बढ़ता गया और उन्होंने पार्टी छोड़ दी।










