- इन भगवान की बारात निकाली थी तब सभी पेड़ में बैठे थे नीलकंठ
Ekhabri धर्म दर्शन। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने बताया है की जब अयोध्या भगवान श्रीराम की बारात जनकपुर जा रही थी तब रास्ते के सभी वृक्षों में नीलकंठ पक्षी दाना चुगते दिखाई दिए। तुलसीदास जी ने बारात निकलने का बहुत ही सुंदर चित्रण करते हुए लिखा, कि बारात निकलते समय सुंदर शुभ फल दायक शकुन होने लगे जिसमें नीलकंठ पक्षी दाना चुग रहा है। स्पष्ट है कि यह मनोरम दृश्य मानों समस्त मनोकामना को पूर्ण करने वाला है। इसलिए नीलकंठ पक्षी का दिखना हमारे कार्यों के निर्विघ्न पूर्ण होने का संकेत है। वैसे तो नीलकंठ के दर्शन करना हर दिन शुभ होता है लेकिन आज इसका विशेष महत्व है।
महादेव का स्वरूप है पक्षी नीलकंठ :
सतयुग की घटना माना जाता है की धरती पर असुरों ने यज्ञ हवन जप तप पूजा पाठ सब बंद करवा दिया था। देवताओं के पास केवल एक ही उपाय था। अमृत के बिना देवता की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन में अमृत के पहले कालकूट विष ( जहर ) निकला जो बहुत ही भयावह मानो पूरी सृष्टि से जीव को खत्म कर देता। कालकुट तेजी से फैलने लगे, इससे सभी जीव जलने लगे। तब देवताओं ने शिव जी से प्रार्थना किया तब शिव जी विष को पीकर अपने गले में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला हो गया तब महादेव को नीलकंठ के नाम से भी जाना गया। विजयादशमी के दिन सुबह उठते ही नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना शुभ माना गया हैं।











