रात के बाद दिन होना निश्चित है। ऐसा नहीं हो सकता कि जीवन भर रात ही हो या दिन ही रहेगा। जैसे अंधियारी रात को सूर्य का प्रकाश दूर कर नई सुबह का स्वागत करता है। वैसे ही परीक्षा भरा समय भी बीत जाया है और फिर से एक न एक दिन नए कल का आगाज होता है। इसी उम्मीद के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करना चाहिए। ऐसा नहीं है हर दिन परीक्षा देते ही बीत, खुशियों से भरा भी दिन वापस आए।










