राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इन दिनों यूक्रेन में मानव मूल्यों की रक्षा में जुटा है। भारत से बाहर हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से सेवा कार्य करने वाले संघ के स्वयंसेवकों का जत्था यूक्रेन में अध्ययनरत भारतीय छात्रों को स्वदेश भेजने की हर संभव कोशिश कर रहा है। उनके ठहरने और खाने की व्यवस्था करने के साथ-साथ उन्हें सीमा तक पहुंचा रहा है। वहां अलग-अलग प्रांतों में रहने वाले भारतीयों में से लगभग 300 से 400 लोग हिंदू स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। इनमें से जो भी जिस क्षेत्र में रह रहे हैं, भारत के विद्यार्थियों की हर स्तर पर मदद कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि भारतीय छात्रों के बीच सही जानकारी के अभाव में भटकाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वे जिस ओर कुछ लोगों को जाते देखते हैं, सही ठिकाने की आस में उधर ही चल देते हैं। इससे सीमा पर भी अनावश्यक भीड़ हो जा रही है। ठंड अधिक होने के कारण भी उन्हें परेशानी हो रही है। ऐसे में स्वयंसेवक भारतीय दूतावास से संपर्क स्थापित कर भारत जाने वाले लोगों को सही सूचना उपलब्ध करा रहे हैं। उन्हें बता रहे हैं, किस समय, कहां पहुंचना है। गंतव्य तक पहुंचाने में भी वे उनकी मदद कर रहा है। कुछ अन्य सामाजिक संगठन भी उनकी मदद कर रहे हैं।
50 से अधिक देशों में चलता है संघ का काम : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भारत से बाहर 50 से अधिक देशों में शाखाएं लगती हैं। उन देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से सभी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। वहां का गणवेश सफेद कमीज और ब्लैक पैंट होता है। प्रार्थना के अंत में भारत में लोग भारत माता की जय बोलते हैं वहां विश्व धर्म की जय बोलते हैं। आरएसएस की ओर से इस काम को विश्व विभाग देखता है। दिल्ली में इसका कार्यालय है।









