कर्म से ही हम हैं। हमारी पहचान का दो कारण हो सकता है एक हमारा कर्म यानी की काम और दूसरा हमारा व्यवहार। अगर ये सही है तो पूरा दुनिया में हमारे लिए सफलता के अवसर मिल सकते हैं।
काम और व्यवहार से हमें वर्तमान में ही नहीं बल्कि हमारे भविष्य में भी लोग याद रखेंगे और यही हमारी नई पीढ़ी के लिए वरदान साबित होगा क्योंकि हम उनके लिए चलती फिरती पाठशाला हैं जो हमेशा एक नई सीख और पाठ पढ़ाती है।










