रायपुर, 05 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली प्रख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश और विश्व के लोककला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई केवल एक लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवंत प्रतीक थीं। उन्होंने अपने समर्पण, अद्भुत प्रस्तुति और सशक्त आवाज के माध्यम से पंडवानी जैसी लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनका निधन सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
गरीबी से वैश्विक मंच तक का प्रेरणादायक सफर
24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बेहद साधारण परिवार में पली-बढ़ीं तीजन बाई को बचपन से ही महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में रुचि थी। उनके नाना ब्रजलाल परधा ने उन्हें इस लोककला की प्रारंभिक शिक्षा दी।
महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया। उन्होंने परंपराओं को तोड़ते हुए पंडवानी की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद और गायन के साथ प्रस्तुति देना शुरू किया, जो उनकी विशिष्ट पहचान बन गई।
हबीब तनवीर ने दी नई दिशा
प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया। इसके बाद तीजन बाई ने देश-विदेश में कई प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में पंडवानी का प्रदर्शन कर भारतीय लोकसंस्कृति का परचम लहराया।
सम्मानों से सजा शानदार करियर
लोककला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में फुकुओका पुरस्कार और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें मानद डी.लिट. की उपाधि भी प्रदान की गई।
नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
तीजन बाई ने न केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि इस कला से नई पीढ़ी के कलाकारों को भी जोड़ा। उनकी प्रेरणा से कई महिला कलाकारों ने इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
देशभर से श्रद्धांजलि
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कई जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
अमर रहेगी सांस्कृतिक विरासत
तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रतीक रहा। उन्होंने महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुंचाकर पंडवानी को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बनी रहेगी।
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