तू शास्त्रों में बताए गए अपने धर्म के अनुसार कर्म कर, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करने से तेरा शरीर निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा।
जब तक हम कर्म नहीं करेंगे हमें फल नही मिलेगा और हमारे कर्म के साथ ही भगवान उसका फल भी निश्चित कर देते है इस लिए ही कहा जाता है जैसा बोओगे वैसा पाओगे, इस लिए अच्छा करो और उसका अच्छा फल भी पाओ।










