घुस्सा आने पर चिल्लाने के लिए ताकत नहीं लगती, घुस्सा आने पर शांत बैठने पर ताकत ज़रूर लगती है।
आमतौर पर यही होता भी है हम गुस्सा होकर जोर से चिल्लाने लगते हैं, इससे हमारी ऊर्जा तो व्यर्थ में जाती ही है साथ ही हमारे से जुड़े कई लोगों में इसका नकारात्मक असर भी दिखाई देता है।
जब नाराजगी हो तो उसको हंस के टालने की कोशिश करना चाहिए न की उसे बढ़ाने की। गुस्सा कभी किसी के लिए अच्छा साबित नही हुआ है फिर भला इससे क्यों नजदीकी बनाना ऐसे व्यवहार को दूर करने में ही भलाई है।









