इलाईची के दानों सा मुक़द्दर है अपना।
महक उतनी ही बिखरती गई जितने पिसते गए। कभी अपने लिये, कभी अपनों के लिए।
बस जीवन किसी का जीवन में हर दिन संघर्ष रहता है कभी छोटी परेशानी तो कभी बड़ी परेशानी सामने आ कर खड़ी हो जाती है। हमें उस समय उन खुशियों का सोचना चाहिए जो हमें उस संघर्ष के बाद मिलने वाली है और दोगुनी खुशियां दे कर जाने वाली हैं।









