सुप्रभात: साथ जरूरी है !

गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं। बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं। न जाने कौन सी शोहरत पर आदमी को नाज है, जबकि आखिरी सफर के …

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