दिल्ली से औरैया जा रही प्राइवेट स्लीपर कोच बस यमुना एक्सप्रेस वे पर बस का कंडक्टर अनुसूचित जाति की किशोरी से दुष्कर्म किया। हेल्पर ने उसकी मां के साथ छेड़छाड़ की। मां के हंगामा शुरू किया तो दोनों बस से उतरकर फरार हो गए। पुलिस ने बस को कब्जे में लेकर आरोपी कंडक्टर को पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक शिकोहाबाद निवासी 35 वर्षीय महिला अपनी 19 वर्षीय भांजी के साथ दिल्ली में गारमेंट फैक्ट्री में नौकरी करती है। उसका पति और बेटा भी यहीं रहते हैं। महिला अपनी भांजी और 14 साल की बेटी के साथ शिकोहाबाद आने के लिए दिल्ली के बदरपुर बार्डर से स्लीपर कोच बस में सवार हुई। बस में 25 यात्री, कंडक्टर अंशू उर्फ आलोक यादव निवासी इटावा और बबलू निवासी इटावा थे।
दुष्कर्म पीडिता की मां ने बताया कि अंशू को वह पहले से जानती थी। अंशू और बबलू ने केबिन में बैठकर शराब पी और उसे भी पैग बनाकर दिया, जो उसने फेंक दिया। एक घंटे बाद बस रुकी तो अन्य यात्रियों के साथ वह भी टायलेट करने उतर गई। लौटी तो देखा कि बेटी सीट पर नहीं है। भांजी ने बताया कि वह केबिन में गई है। आवाज लगाने पर बेटी केबिन से रोते हुए निकली और अंशू के दुष्कर्म करने की जानकारी दी। इससे पहले बबलू ने उसका हाथ बुरी नीयत से पकड़ा था।
महिला ने हंगामा किया, लेकिन बस नहीं रुकी। टोल गुजरने के बाद अंशू और बबलू उतरकर भाग गए। महिला के फोन से सूचना देने पर उसके देवर और बेटे ने शिकोहाबाद में सुभाष तिराहे पर बस रुकवाकर पुलिस बुला ली। पुलिस ने बस की जांच करने के साथ पीड़िता, उसकी मां व अन्य यात्रियों के बयान दर्ज किए।
पीड़िता की मां की तहरीर पर अंशू के खिलाफ दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट तथा बबलू के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया गया है। अंश्ू को पकड़ लिया गया है। फरार बबलू इटावा का शातिर अपराधी है। पीड़िता और उसकी मां का मेडिकल कराया गया है। जांच के बाद आरोपितों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।










