छत्तीसगढ़ के कोरबा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस से ज्योत्सना महंत तो भाजपा से सरोज पांडे मैदान में हैं। दोनों ही करोड़पति प्रत्याशी हैं। इस क्षेत्र के मरवाही के वनांचल से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासी समुदाय की एक महिला शांति मरावी ने भी लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा है। शांति बाई पहाड़ी गांव बेंदरपानी की रहने वाली है। शांति के अकाउंट में जीरो बैलेंस है और हाथ में नकद 20000 रुपये है। सीमित संसाधनों में वह करोड़पति महिला प्रत्याशियों को लोकसभा चुनाव में टक्कर दे रही है। शांति बाई मरावी किसान हैं और उन्होंने सरकारी स्कूल से 5वीं तक पढ़ाई की है। वह दैनिक वेतनभोगी कर्मी है। उनके घर का खर्च खेती किसानी से होने वाली आय से चलता है।
शांति बाई के पास चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ 20 हजार नकद हैं। उनके नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा की पेंड्रा शाखा में खाता है। इसमें 1 रुपए भी नहीं है। वहीं, भारतीय स्टेट बैंक के महतारी वंदन वाले खाते में दो हजार रुपए हैं, जिसे उसे सरकार ने महतारी वंदन योजना के तहत दिए हैं।
अचल संपत्ति के मामले में भी शांति, भाजपा कांग्रेस की प्रमुख प्रत्याशियों के सामने बहुत कमजोर है। उनके पास लगभग डेढ़ एकड़ खेतीहर जमीन है। मात्र 10 ग्राम सोना और 50 ग्राम चांदी है। शांति बाई मरावी बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। उनके पास ना खुद का मल्टीमीडिया मोबाइल है, न ही कोई सोशल अकाउंट। सोशल मीडिया वाले चुनाव प्रचार के दौर में शांति बाई बैगा घर घर जाकर प्रचार कर रही है। शांति बाई ने बताया कि कांग्रेस और भाजपा वालो ने उनके गांव का ख्याल नहीं किया, उनके गांव में रोड और पुलिया नहीं, इसलिए वे अपने गांव क़े विकास के लिए चुनाव लड़ रही है।










