भारत और चीन के बीच रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है। एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाते हुए भारत सरकार ने चीनी पेशेवरों के लिए बिजनेस वीजा के नियमों को आसान बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी टैरिफ के बीच पड़ोसी देश के साथ संबंधों को सुधारने की कवायद के तहत यह फैसला लिया गया है। इस नए बदलाव के बाद अब चीनी प्रोफेशनल्स को बिजनेस वीजा मिलने में होने वाली लंबी देरी खत्म हो जाएगी और वीजा मंजूरी की प्रक्रिया एक महीने से भी कम समय में पूरी हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने वीजा प्रक्रिया से अतिरिक्त प्रशासनिक जांच की परतों (Layers) को हटा दिया है, जिससे अब चार सप्ताह के भीतर वीजा प्रोसेस किया जा रहा है।
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इसके चलते भारत ने चीनी नागरिकों की यात्रा पर अघोषित रोक लगा दी थी और बिजनेस वीजा को गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की सख्त निगरानी के दायरे में रख दिया था। हालांकि, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात और सात वर्षों में पहली बार रिश्तों को पटरी पर लाने की सहमति बनने के बाद स्थितियों में सुधार हुआ है। इसी क्रम में दोनों देशों के बीच सीधी विमान सेवाओं की भी फिर से शुरुआत हुई है और अब वीजा नियमों में यह ढील दी गई है।
वीजा नियमों में कड़ाई के कारण भारतीय उद्योगों को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ (ORF) नामक थिंक टैंक के अनुमान के मुताबिक, वीजा में देरी और सख्त जांच के चलते पिछले चार वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण करने वाली भारतीय कंपनियों को करीब 15 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियां, जो चीन से जरूरी उपकरणों का आयात करती हैं और चीनी इंजीनियरों पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। रायटर की रिपोर्ट के मुताबिक, शाओमी जैसी बड़ी कंपनियों को भी वीजा पाने में संघर्ष करना पड़ा था। इसके अलावा सोलर इंडस्ट्री को भी स्किल्ड लेबर की भारी किल्लत झेलनी पड़ी, जिससे कई प्रोजेक्ट्स और विस्तार योजनाएं प्रभावित हुईं।
इंडस्ट्री ने सरकार के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है। इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के प्रमुख पंकज मोहिंद्रू ने सीमा से सटे देशों के पेशेवरों के लिए स्किल्ड-वीजा अप्रूवल में तेजी लाने के निर्णय को सराहा है। बताया जा रहा है कि यह फैसला पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अगुवाई वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य चीन से होने वाले निवेश की राह को आसान बनाना और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गति देना है। हालांकि, इस मामले पर विदेश मंत्रालय या पीएमओ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वीजा का मुद्दा अब सुलझा लिया गया है।










