बिलासपुर: राजधानी से लगे गांव में अवैध उत्खनन के चलते तकरीबन 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर हो गई है। ये जमीन अब खेती के लायक नहीं रह गई है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने खनिज विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। निसदा गांव में 400 एकड़ जमीन बंजर हो गई है। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने लीज एरिया से बाहर हो रहे उत्खनन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बेंच ने खनिज सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 26 फरवरी की तिथि तय कर दी है।आरंग के ग्राम निसदा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। पीआइएल में बताया है, गांव में ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी। लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर उत्खनन शुरू कर दिया। खनन के दौरान निकलने वाला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डंप किए जा रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और आसपास की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है।याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि तीन साल पहले पर्यावरणीय अनुमति समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में बेखौफ उत्खनन और धड़ल्ले से ब्लास्टिंग की जा रही है।सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने डिवीजन बेंच को बताया, कलेक्टर ने अवैध उत्खनन की शिकायत पर खनिज विभाग से जांच कराई थी। जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया है। पर्यावरणीय अनुमति खत्म होने के बाद भी उत्खनन करने वाले सात दोषी लीजधारकों पर 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है।









