बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश कांग्रेस में अंतर्कलह की शुरु हो गई है। पार्टी के प्रदर्शन को लेकर बागी सुर उठने लगे हैं। खुद कांग्रेस के ही नेता हार के लिए अपनी ही पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पार्टी के बड़े नेता तारिक अनवर ने बिहार में महागठबंधन की सरकार नहीं बनने पर कांग्रेस को जिम्मेवार माना है।
चुनाव में हार के बाद महागठबंधन पहले ईवीएम को दोषी बता रहा है तो बाद में प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। अब महागठबंधन की हार का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा जाने लगा है। महागठबंधन की हार के पीछे पार्टी के कमजोर प्रदर्शन को कारण माना जा रहा है। वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने ट्वीट कर आला नेताओं को आत्ममंथन की सलाह दी है।
अनवर ने अपने ट्वीट में लिखा कि हमें सच को स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के कारण महागठबंधन की सरकार से बिहार महरूम रह गया। कांग्रेस को इस विषय पर आत्मचिंतन करने जरूरत है। उससे कहां चूक हुई? ओबैसी की पार्टी की बिहार में इंटरी शुभ संकेत नहीं है।
कांग्रेस ने बिहार में 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन 19 सीट ही जीत पाई, जबकि 2015 में कांग्रेस ने 25 सीटें जीती थीं। ऐसे में महागठबंधन को इस खराब प्रदर्शन का बहुत बुरा खामियाजा भुगतना पड़ा और वह सरकार बनाने से वंचित रह गया। तेजस्वी यादव मात्र 0.03 फीसदी वोटों के अंतर से ही मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।
इधर दरभंगा के जाले विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के दावेदार रहे ऋषि मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री नहीं बन सके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा खुद मिथिलांचल की राजनीति करते हैं, लेकिन वहां की 30 सीटों पर कांग्रेस एक भी चुनाव नहीं जीती है।
ऐसे में उन्हें मिथिलांचल से हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। कांग्रेस ने जाले सीट से दावेदार मिश्रा की बजाए मशकूर अहमद उस्मानी को टिकट दिया था। मशकूर के जिन्ना कनेक्शन के बाद सत्ता पक्ष के नेता कांग्रेस पर सवाल खड़े कर रहे थे। जाले से भाजपा के जीबेश कुमार चुनाव जीते हैं।
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