रायपुर। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर नगर पालिक निगम ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर इस वर्ष भी खारून नदी के किनारे महादेव घाट में बनाए गए विसर्जन कुंड में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई गई थी, जिसके बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाएगा।
गणेश झांकियों और प्रतिमाओं का प्रारंभ शारदा चौक से होगा। यहां झांकियों को नंबर दिए जाएंगे। इसके बाद झांकी और प्रतिमाएं जयस्तंभ, कोतवाली, सदर बाजार, सत्ती बाजार, कंकाली तालाब, पुरानी बस्ती थाना चौक, लीली चौक, लाखेनगर चौक, सुंदरनगर और महादेव घाट रिंग रोड चौक होते हुए रायपुरा महादेव घाट स्थित विसर्जन कुंड तक पहुंचेंगी। लाखेनगर चौक से महादेव घाट रिंग रोड तक वन-वे यातायात व्यवस्था लागू रहेगी।
नगर निगम ने गणेश विसर्जन की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए 25 सितंबर सुबह 6 बजे से 1 अक्टूबर सुबह 6 बजे तक अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। जोनवार और चक्रानुसार व्यवस्था के तहत जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उपअभियंता, समयपाल और अन्य निगम कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
नगर निगम ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और शासन के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन खारून नदी में सीधे नहीं किया जाएगा। प्रतिमाओं को निर्धारित विसर्जन कुंड में ही विसर्जित किया जाएगा, ताकि नदी के पानी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। विसर्जन से पहले पूजन सामग्री को अलग कर निर्धारित स्थान पर रखने की व्यवस्था भी की जाएगी।
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सड़क पर यातायात बाधित करने वाले गणेश पंडालों के संबंध में भी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को सूचना देकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने कहा गया है।
महादेव घाट स्थित गणेश विसर्जन स्थल की व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम ने विशेष समिति गठित की है। अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति में निगम के वरिष्ठ अभियंताओं, नगर निवेश विभाग, जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
विसर्जन स्थल पर केन, मंच, शामियाना, प्रकाश व्यवस्था, माइक, कंट्रोल रूम, मोटर बोट, गोताखोर, मजबूत रस्से, लांग बूट, रेनकोट और बड़े आकार के छाते जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए होमगार्ड और अग्निशमन विभाग के साथ भी समन्वय किया जाएगा।
लाखेनगर चौक पर सर्च लाइट, पंडाल, मंच, माइक और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्राथमिक उपचार, एंबुलेंस, मेडिकल कैंप और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था भी रहेगी। महादेव घाट विसर्जन स्थल पर चिकित्सकीय टीम और एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय किया जाएगा।
नगर निगम द्वारा विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है। इन वाहनों को तेलीबांधा तालाब, बूढ़ातालाब और लाखेनगर चौक सहित निर्धारित स्थानों पर तैनात किया जाएगा। निगम ने तेलीबांधा तालाब, बूढ़ातालाब और शहर के अन्य तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं। छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर के विभिन्न तालाबों के किनारे अस्थायी विसर्जन कुंड बनाए जाएंगे।
गणेश विसर्जन रूट और महादेव घाट स्थित विसर्जन कुंड तक पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। विसर्जन स्थल पर बिजली बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए जनरेटर की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर लगातार विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
महादेव घाट स्थित विसर्जन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गणेश प्रतिमाओं के पूजन की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए संस्कृत कॉलेज से 10 पंडितों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गणेश विसर्जन मार्ग पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर भवनों का सर्वे भी कराया जाएगा। संबंधित मकान मालिकों को भवनों की मरम्मत और आवश्यक सुधार के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही पूरे विसर्जन मार्ग और लिंक मार्गों पर गड्ढों की मरम्मत, पेचवर्क, निर्माण सामग्री हटाने और साफ-सफाई का काम कराया जाएगा।
विसर्जन रूट और महादेव घाट स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए शहर में आवारा मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस में रखने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग और संबंधित जोन अधिकारियों को दिए गए हैं।
नगर निगम के अनुसार गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से व्यवस्थाएं संचालित की जाएंगी।










