रायपुर, 10 मार्च 2026।डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा युवाओं के लिए बेहतर करियर की नई संभावनाएं खोल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग के बीच कंप्यूटर प्रशिक्षण आज रोजगार के महत्वपूर्ण साधनों में शामिल हो गया है। इसी दिशा में बस्तर जिले की एक युवती ने सरकारी योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के पंडरीपानी गांव की रहने वाली प्रियंका मंडल ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना का लाभ लेकर अपना कंप्यूटर कोचिंग सेंटर स्थापित किया है। उनके इस प्रयास से न केवल वे स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
प्रियंका मंडल के परिवार में माता-पिता, भाई और भाभी सहित कुल पांच सदस्य हैं। उन्होंने स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे संविदा के रूप में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्य कर रही थीं। कंप्यूटर के क्षेत्र में रुचि होने के कारण वे हमेशा इस क्षेत्र में कुछ नया करने की सोचती थीं।
प्रियंका ने देखा कि बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चे कंप्यूटर सीखना चाहते हैं, लेकिन शहरों तक आने-जाने में होने वाली परेशानी और अधिक खर्च के कारण वे कंप्यूटर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने गांव में ही कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया, लेकिन आर्थिक स्थिति उनके सामने बड़ी बाधा बन रही थी।
इसी दौरान उन्हें अपने एक मित्र के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से संपर्क कर योजना के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की और आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऋण के लिए आवेदन किया। योजना के तहत उनके कंप्यूटर कोचिंग सेंटर का प्रकरण भारतीय स्टेट बैंक पंडरीपानी शाखा को भेजा गया, जहां से 20 जून 2025 को उन्हें सात लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।
प्रियंका बताती हैं कि उनके कंप्यूटर कोचिंग सेंटर को संचालित हुए करीब नौ महीने हो चुके हैं। इस दौरान उनके संस्थान में 20 विद्यार्थियों को कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके साथ ही उन्होंने अपने सेंटर के माध्यम से तीन युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। वे नियमित रूप से बैंक ऋण की किस्तों का भुगतान भी कर रही हैं।
प्रियंका मंडल की यह पहल बस्तर के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उनका मानना है कि स्नातक युवाओं को सॉफ्टवेयर कौशल विकसित करने, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान बढ़ाने और नवीनतम तकनीकी रुझानों से अवगत रहने की आवश्यकता है। कार्यशालाओं और सेमिनारों में भाग लेने से भी युवाओं को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
प्रियंका की सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।










