रायपुर : पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभ्यर्थियों ने भर्ती में अनियमितता, पारदर्शिता की कमी और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब राज्यपाल के बाद उच्च शिक्षा मंत्री तक पहुंच गया है।
अभ्यर्थियों का आरोप, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं और नियमों की अनदेखी
अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता देने के नियम को नजरअंदाज किया गया है। साथ ही पात्र और अपात्र सूची में भी कई त्रुटियां बताई गई हैं।
API स्कोर और अंक सार्वजनिक नहीं करने का आरोप
अभ्यर्थियों का यह भी आरोप है कि अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक यानी API स्कोर सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में यह प्रक्रिया पारदर्शिता के तहत प्रकाशित की जाती है। चयन के बाद प्राप्त कुल अंकों की सूची भी जारी नहीं की जा रही, जिसे अभ्यर्थी प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बता रहे हैं।
UGC नियमों के उल्लंघन का भी आरोप
एसोसिएट प्रोफेसर बायोटेक्नोलॉजी के एक बैकलॉग पद के साक्षात्कार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि UGC के नियम 10(F)(iii) के अनुसार केवल नियमित अनुभव को मान्यता दी जानी चाहिए, लेकिन यहां तदर्थ, संविदा और अस्थायी अनुभव को भी शामिल किया गया है।
स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की मांग
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही डोमिसाइल प्रमाण पत्रों की सख्त जांच और सभी मूल्यांकन मानकों को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
पारदर्शिता के लिए उठाई गई कई मांगें
अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि शॉर्टलिस्टिंग के दौरान API स्कोर, डोमिसाइल स्थिति और अन्य मानदंड सार्वजनिक किए जाएं। साक्षात्कार से पहले आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाए और अंतिम चयन सूची में सभी उम्मीदवारों के अंक जारी किए जाएं।
कुलपति का बयान, जांच की जरूरत नहीं, प्रक्रिया नियमों के अनुसार
विवाद पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया के लिए समिति गठित की गई है और पूरी प्रक्रिया UGC नियमों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर किसी जांच की आवश्यकता नहीं है और समिति में वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, इसलिए प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
मामला अब सरकार तक पहुंचा, आगे की कार्रवाई पर नजर
यह मामला अब उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंच चुका है और अभ्यर्थी पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन अपने पक्ष में नियमों के पालन की बात कह रहा है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।










