रायपुर। छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN यानी ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज पोर्टल का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री तोखन साहू, CMDC के चेयरमैन सौरभ सिंह सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि TIN पोर्टल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप खनिज संसाधनों के सतत और समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल खनिज संसाधनों को स्थानीय जनजातीय परिवारों की आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ व्यवस्था को मजबूत करेगी।
TIN पोर्टल के माध्यम से बस्तर संभाग में जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क की खरीदी से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। इसका उद्देश्य टिन संग्राहकों को पारदर्शी व्यवस्था के तहत उचित और समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराना है।
# LME आधारित मूल्य निर्धारण से मिलेगा बाजार के अनुरूप भुगतान
TIN पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था शामिल है। इसके माध्यम से टिन अयस्क का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुरूप निर्धारित किया जा सकेगा। इससे संग्राहकों को अधिक पारदर्शी और बाजार आधारित मूल्य मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से टिन बिक्री की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और भुगतान में होने वाली देरी की संभावना भी घटेगी।
# डिजिटल रजिस्ट्रेशन से QR सत्यापन तक, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
TIN पोर्टल पर टिन संग्राहकों के डिजिटल पंजीयन और पहचान की व्यवस्था की गई है। बैंकिंग सेवाओं के एकीकरण के साथ QR कोड आधारित सत्यापन, स्मार्ट कार्ड एवं पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
पोर्टल में CMDC मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और टिन क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। हितग्राहियों को SMS अलर्ट के माध्यम से भुगतान और लेन-देन की स्थिति की जानकारी भी मिल सकेगी।
इस डिजिटल व्यवस्था से CMDC को स्टॉक, राजस्व, भुगतान और खरीदी प्रक्रिया की निगरानी में भी सुविधा होगी। साथ ही कागजी कार्यवाही कम होने से पूरी प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी।
# छह टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, तीन नए केंद्र प्रस्तावित
CMDC वर्तमान में बस्तर संभाग में छह टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी कर रहा है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार के क्रय केंद्र शामिल हैं।
अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन बेचने की सुविधा देने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में तीन नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को परिवहन संबंधी कठिनाइयों से राहत मिलेगी और वे औपचारिक एवं पारदर्शी खरीदी व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।
# नई SOP से टिन खरीदी प्रक्रिया होगी सरल
TIN पोर्टल के साथ CMDC ने टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू की है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था की गई है।
सैंपल की संख्या 12 से घटाकर छह कर दी गई है और प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम किया गया है। परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति होने की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान भी किया गया है।
इन बदलावों से परीक्षण और विश्लेषण प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करने के साथ लागत में कमी आने की उम्मीद है। मासिक विश्लेषण शुल्क 14,400 रुपये से घटाकर 7,200 रुपये किया गया है। CMDC के अनुसार इन सुधारों से करीब 10 लाख रुपये वार्षिक तक की संभावित बचत हो सकती है।
# दो साल में टिन खरीदी से करोड़ों रुपये का भुगतान
CMDC की ओर से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क की खरीदी के बदले लगभग 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क की खरीदी के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। आंकड़ों से स्पष्ट है कि टिन संग्रहण से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ा है।
# टिन संग्रहण को स्थायी आजीविका से जोड़ने की कोशिश
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था।
अब TIN पोर्टल के जरिए इस सामुदायिक व्यवस्था को आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित और स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करना है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाला आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंच सके।
# सरकार के लिए भी बनेगा डिजिटल गवर्नेंस का मजबूत प्लेटफॉर्म
TIN पोर्टल केवल टिन बिक्री और भुगतान का डिजिटल माध्यम नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन का प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए सरकार को राजस्व और खरीदी से संबंधित रियल टाइम जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
CMDC को स्टॉक ट्रैकिंग, भुगतान, ऑडिट अनुपालन और विभिन्न क्रय केंद्रों की निगरानी में भी सुविधा मिलेगी। डिजिटल आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
# CMDC और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ एमओयू
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन यानी एमओयू भी हुआ। इस समझौते का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना और टिन संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान तथा मूल्य संवर्धन की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
कुल मिलाकर TIN पोर्टल बस्तर के टिन संग्राहकों को डिजिटल पहचान, बैंकिंग सुविधा, LME आधारित मूल्य निर्धारण, DBT भुगतान और रियल टाइम निगरानी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के आर्थिक लाभ को स्थानीय जनजातीय समुदायों तक अधिक पारदर्शी और सीधे तरीके से पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होगी।










