रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती झेलने वाला छत्तीसगढ़ अब शांति, विश्वास और विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका समेत विकास के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम जमीन पर दिखाई देने लगे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट में 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है। राज्य का करीब 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधन मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संपदा के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इन संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
# सुरक्षा और विकास की रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा। वर्ष 2023 में राज्य में नई सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने बेहतर समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को निर्णायक गति मिली।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों के साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने मजबूती से अभियान चलाने के साथ अपने जवानों की क्षति को भी पहले की तुलना में कम रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने करीब चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार जैसी विकास सुविधाओं का विरोध करते थे। इसके कारण कई दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। सरकार ने इसलिए नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।
# नियद नेल्लानार से दूरस्थ गांवों तक पहुंचा विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की शुरुआत से ही यह स्पष्ट नीति रही है कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं है। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और परिवार तक विकास की सुविधाएं पहुंचाना जरूरी है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई, जिसका गोंडी भाषा में अर्थ ‘आपका अच्छा गांव’ है।
इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास कार्यों को और गति देने के लिए ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी शुरू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है। राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और करीब 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों तक पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।
# शांति के बाद पर्यटन और रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को करीब से अनुभव कर रहे हैं।
सरकार बस्तर में होम-स्टे को बढ़ावा देने के लिए ऋण और अनुदान की सुविधा उपलब्ध करा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे करीब 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
# आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से मुख्यधारा में लौटने का अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हिंसा के स्थान पर संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता देने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में हो रहा सकारात्मक बदलाव ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी जवाब है।
# युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर देना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उच्च शिक्षा की पहुंच विकासखंड स्तर तक बढ़ाई जा रही है। आईआईटी, आईआईएम और ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान भी प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जहां विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार कई सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।
# नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को रफ्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक करीब 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेश के माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
# किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख
कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।
उन्होंने बताया कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के बाद गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में मिली प्रत्येक जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।
कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।










