Google Analytics Meta Pixel घोलेंग में हुनर को नई उड़ान, टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार के अवसर बढ़े - Ekhabri.com

घोलेंग में हुनर को नई उड़ान, टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार के अवसर बढ़े

रायपुर। कभी घर-आंगन और गांव की परंपराओं तक सीमित रहने वाला हुनर अब रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहा है। जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और बाजार की जरूरतों से जोड़कर महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। यह पहल स्थानीय हुनर को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के प्रयासों को लगातार गति दी जा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिलाओं और युवाओं को आधुनिक तकनीक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। घोलेंग का आजीविका परिसर इसी सोच को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक उदाहरण बनकर सामने आया है।

 

ग्राम घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान एवं टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के संयुक्त प्रयास से संचालित यह पहल प्रशिक्षण को केवल कौशल सीखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसके साथ उत्पादन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

 

घोलेंग में आजीविका से पारंपरिक रूप से जुड़े करीब 35 से 40 परिवारों एवं स्व सहायता समूहों की महिलाओं को हैंडलूम और टेक्सटाइल से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं आधुनिक तकनीक और मशीनों के माध्यम से कपड़ा तैयार करने के साथ शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने का कौशल सीख रही हैं।

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इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण के जरिए हाथों में हुनर देने के साथ उसे आय का साधन बनाना है। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन का अवसर मिलने से महिलाएं सीखे हुए कौशल को वास्तविक कार्य में उपयोग कर रही हैं और भविष्य में इसे नियमित आजीविका से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

 

जशपुर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय हुनर के लिए जाना जाता है। घोलेंग में इसी पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को उत्पादन की आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है।

 

इससे पारंपरिक हस्तकरघा कला को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने के बजाय उसे आधुनिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है। बेहतर डिजाइन और गुणवत्ता वाले उत्पादों को बाजार से जोड़ने की तैयारी के साथ स्थानीय हस्तकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।

 

इस पहल में महिला स्व सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अपने समूहों के माध्यम से उत्पादन गतिविधियों में भागीदारी कर सकेंगी। इससे समूह आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है।

 

महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने का असर केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता। उनकी आय बढ़ने से परिवार की जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत होती है। इस तरह घोलेंग में विकसित हो रही यह पहल महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।

 

स्थानीय स्तर पर कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है। प्रशिक्षित युवा भविष्य में स्वयं उत्पादन इकाई, समूह आधारित गतिविधि या अन्य स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आर्थिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

 

घोलेंग स्थित हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र को भविष्य में कौशल, उत्पादन और बाजार के बीच मजबूत कड़ी के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तैयार होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन को बाजार की मांग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय प्रतिभा को स्थानीय और व्यापक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल सके।

 

यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब पारंपरिक हुनर को आधुनिक कौशल, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा जाता है, तो वही हुनर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।

 

घोलेंग में चल रही यह पहल केवल कपड़ा बनाने का प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि हुनर को सम्मान, कौशल को अवसर और अवसर को आय में बदलने की दिशा में प्रयास है। महिलाओं के हाथों में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक हुनर है, युवाओं के सामने रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

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जहां कभी हस्तकरघा केवल परंपरा की पहचान हुआ करता था, वहीं अब वही हुनर रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। घोलेंग से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में जशपुर के स्थानीय हुनर को नई पहचान देने के साथ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की प्रभावी मिसाल बन सकती है।

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