रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधों से बचाव और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जनभागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता, सतर्कता और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। साइबर सुरक्षा केवल सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने साइबर जागरूकता को जनआंदोलन बनाने की अपील की। मुख्यमंत्री शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया के विस्तार से देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का तेजी से प्रसार हुआ है। अब गांवों में रहने वाले लोग भी मोबाइल के माध्यम से डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं। हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के बढ़ने के साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों को साइबर अपराधों के तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना आवश्यक है।

सात सप्ताह में 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश
छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह का विशेष साइबर जागृति अभियान चलाया। मुख्यमंत्री ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से शहरों से लेकर गांवों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। अभियान के दौरान पांच लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और पांच लाख से अधिक सेल्फी के माध्यम से लोगों की सहभागिता दर्ज की गई। इस पहल के जरिए लगभग 1.70 करोड़ लोगों तक साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी पहुंचाई गई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात सप्ताह का अभियान पूरा होने का अर्थ साइबर जागरूकता की गतिविधियों का समाप्त होना नहीं है। यह एक नई शुरुआत है और अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं से साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
## डिजिटल सुरक्षा, यूपीआई और डिजिटल अरेस्ट पर जागरूकता
साइबर जागृति अभियान के तहत प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से सात विषय आधारित सप्ताहों में गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी और यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषय शामिल रहे।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों को ओटीपी और पासवर्ड साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने और फर्जी निवेश योजनाओं से सतर्क रहने की जानकारी दी गई। युवाओं को साइबर प्रहरी के रूप में जोड़कर परिवारों और समुदायों तक जागरूकता पहुंचाने का प्रयास भी किया गया।
पुलिस ने लोगों को साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया।
## सोशल मीडिया पर 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज
साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्ट को 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से संबंधित पोस्ट साझा कर इसकी पहुंच बढ़ाई।
## साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर कार्रवाई, रिकवरी दर बढ़ी
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में होता है। डिजिटल भुगतान ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन साइबर अपराधों से सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ अपराधियों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई कर रही है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों को खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी दर में वृद्धि हुई है।
## जिलों की अभिनव पहल को मिला सम्मान
साइबर जागृति अभियान के दौरान अलग-अलग जिलों ने स्थानीय जरूरतों के अनुसार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को जागरूक किया गया। गरियाबंद में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने परिवारों और समुदायों तक संदेश पहुंचा सकें।
दुर्ग जिले में सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।
जांजगीर-चांपा जिले में एक राखी साइबर जागृति के नाम अभियान से लगभग 1.61 लाख नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। बिलासपुर में आकाशवाणी के विशेष फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में साइबर जागरूकता के लिए अभिनव पहल करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया।
## ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने सुझाए यातायात सुधार के उपाय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि रायपुर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ रही हैं। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि हैकाथॉन में विद्यार्थियों, युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए हैं। उपयोगी सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
ट्रैफिक हैकाथॉन के ओवरऑल विजेता कार्तिकेय पंत ने रायपुर के शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए टैक्टिकल अर्बनिज्म पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें सड़क क्षेत्र का बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान और स्ट्रीट वेंडरों तथा ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित जगह निर्धारित करने जैसे सुझाव शामिल थे।
प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर सहित प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया। उनके सुझावों में पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन का एकीकरण, लेन मार्किंग और यातायात जाम कम करने के उपाय शामिल रहे।
एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन
हैकाथॉन में युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव भी दिए। रायपुर नेत्र और दृष्टि जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, ट्रैफिक जाम की पूर्व सूचना और एम्बुलेंस तथा अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने की परिकल्पना शामिल रही।
ट्रैफिक हैकाथॉन के आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग दिया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रस्तावों का दो चरणों में मूल्यांकन कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का आकलन किया। शिवाशा फाउंडेशन ने भी आयोजन में सहयोग किया।
दूरस्थ क्षेत्रों में ग्रामीण बस सेवा का विस्तार
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी जरूरत है। पहले बस सेवाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे इलाकों में ऐसे मार्गों पर भी 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक लाभ कम होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था कर रही है।
कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर की यातायात व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने यातायात समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना और व्यावहारिक कदम उठाने पर जोर दिया।
समारोह में छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष प्रह्लाद रजक, विधायक राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।










