देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच मोदी सरकार का विशेष ध्यान कोरोनारोधी टीकाकरण पर ध्यान है। अकेले जुलाई में 13 करोड़ से अधिक लोगों काे टीका लगाया गया है। कोरोना से लडाई में टीकाकरण अहम हथियार के रूप में सामने आया है। झारखंड, मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश में बीते कुछ समय में कोरोना से संक्रमित होने वालों में अधिकतर वे लोग हैं जिन्होंने टीके की एक भी डोज नहीं लगवाई है। वहीं टीके की दोनों डोज लेने वालों के संक्रमित होने की संख्या बेहद कम है। इससे स्पष्ट है कि टीका लगवाना कोरोना से सुरक्षित रहने का एक कारगर उपाय है।
झारखंड में इस समय 270 संक्रमित मरीज हैं, इनमें से 89 फीसद मरीजों ने टीका नहीं लगवाया है। 11 फीसद लोगों ने पहली डोज ली है, जबकि दोनों डोज लेनेवाले गिने-चुने लोग संक्रमित हुए। जिसने एक डोज भी ली है, उसे भी गंभीर संक्रमण नहीं हुआ। इसी तरह मध्य प्रदेश में पिछले दो महीने में संक्रमित मरीजों में से 34 फीसद ने टीके की पहली डोज ली है। 12 फीसद मरीज ऐसे भी हैं जो दोनों डोज लगवा चुके हैं। यानी आधे से अधिक संक्रमित वह हैं जिन्हें टीका नहीं लगा है।
बिहार में भी टीका कोरोना से बचाव का कवच है। बिहार में कुल सक्रिय मामले 456 हैं, जिसमें 170 यानी 37.28 फीसद ने टीके की एक भी डोज नहीं लगवाई है। इसमें से 220 यानी 48.24 फीसद पहली डोज लगवा चुके हैं। कुल 456 संक्रमितों में महज 66 यानी 14.47 फीसद लोग टीके की दोनों डोज ले चुके हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोरोना के 36 सक्रिया केस हैं। इनमें कोई अस्पताल में भर्ती नहीं है। चार का टीकाकरण होने और दो को सिंगल डोज लगे होने की जानकारी मिली है।










