उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू गांव में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने के आरोपी एवं कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे का खात्मा हो गया। इसके बाद कानपुर के उसके ही बिकरू गांव में लोगों ने जमकर मिठाइयां बांटीं और खुशियां मनाई। स्थानीय लोगों ने कहा, ऐसा लगता है कि हम आतंक से आजाद हो गए हैं। दरअसल विकास शुरू से ही क्रूर था। 1990 में विकास ने अपने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए पास के ही डिब्बा नवादा गांव में घुसकर लोगों की पिटाई की थी।
इस बीच उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एसटीफ ने बताया कि विकास दुबे को लेकर जा रही गाड़ी किस तरह हादसे का शिकार हुई। एसटीएफ के मुताबिक, जब विकास दुबे को लेकर पुलिस का काफिला जा रहा था, तभी सामने गाय-भैंस का झुंड रास्ते पर आ गया था। ड्राइवर ने इन जानवरों को बचाने के लिए गाड़ी अचानक से मोड़ दिया। इससे गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। इसके बाद विकास दुबे ने हादसे का फायदा उठाकर भागने का प्रयास किया। जब उसे रुकने को कहा गया तो उसने फायर कर दिया। इसके बाद उसे मार गिराया गया।
उधर, मध्य प्रदेश के उज्जैन से लेकर कानपुर आ रहे पुलिस काफिले के साथ चल रहे मीडिया के वाहनो को संचेडी के पास कथित रूप से रोक दिया गया था, हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दिख रहा है कि दुबे के साथ हुए मुठभेड़ स्थल से तीस मिनट पहले ही मीडिया के वाहनों को रोक दिया गया था। एक पत्रकार ने बताया कि पुलिस काफिले के पीछे आ रहे मीडिया के वाहनों को संचेडी इलाके में रोक दिया गया, जिसके कुछ देर बाद ही भौती इलाके में दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर आई। इस बारे में कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने कहा कि उनके पास इसकी कोई जानकारी नही कि विकास दुबे को लेकर आ रहे पुलिस के वाहन के पीछे आ रहे मीडियाकर्मियों के वाहनो को रोका गया था। एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शायद मीडिया के वाहनों को जांच के लिए रोका गया हो।










