अनाज के दानों से भरे पात्र को स्त्री हिला कर व्यवस्थित करती हैं उस समय ये नही पता होता है कि कौन सा दाना ऊपर रहेगा और कौन सा दाना नीचे रहेगा। बस ये पता होता है कि इन सभी दानों को पकाने के बाद ये खाने लायक भोजन बन जायेगा।
आशय ये है कि किसी भी काम को शुरू करने के पहले ये कभी नही सोचना चाहिए कि इसमें कितना फायदा होगा, बल्कि ये देखना चाहिए कि उस कार्य से आपकी कोई हानि तो नही होगी। आपका फायदा उस काम मे ही होगा जिसे करने से आपकी हानि नही होगी।










