Google Analytics Meta Pixel आंगनबाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप, बच्चों के भविष्य को नई दिशा - Ekhabri.com

आंगनबाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप, बच्चों के भविष्य को नई दिशा

रायपुर, 29 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण और देखभाल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और ग्रामीण रोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं। राज्य के जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली और नारायणपुर जिलों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर भी एक उदाहरण बनता जा रहा है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में “बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड” की अवधारणा के तहत आधुनिक भवनों का निर्माण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से लगभग 11.69 लाख रुपए की लागत से तैयार इन भवनों में दीवारों, फर्श और सीढ़ियों को ही शिक्षण सामग्री के रूप में विकसित किया गया है। रंगीन चित्रों और रचनात्मक डिजाइनों के माध्यम से बच्चों को भाषा, गणित, आकृतियों और पर्यावरण की जानकारी सहज तरीके से दी जा रही है।

 

धमतरी जिले में इस मॉडल का प्रभाव विशेष रूप से देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण और उन्नयन किया गया है। ग्राम उड़ेंना का केंद्र इस बदलाव का उदाहरण है, जहां बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि बढ़ रही है। दीवारों और फर्श पर बनाए गए शैक्षणिक चित्र बच्चों में जिज्ञासा और समझ विकसित कर रहे हैं।

 

आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। मनरेगा के माध्यम से निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों को काम मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और पलायन में कमी आई है। इस पहल से शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

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महासमुंद से लेकर नारायणपुर तक आंगनबाड़ी केंद्रों का वातावरण अब अधिक आकर्षक और बाल-अनुकूल हो गया है। शैक्षणिक चार्ट, खेल सामग्री और साफ-सुथरे परिसर बच्चों को केंद्र की ओर आकर्षित कर रहे हैं, जिससे उनकी नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है।

 

इन केंद्रों में बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के लिए भी पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी यहीं से सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बालिकाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

 

स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित खेल क्षेत्र और नियमित साफ-सफाई जैसी सुविधाओं के साथ आंगनबाड़ी केंद्र अब पूरी तरह बाल-अनुकूल बन चुके हैं। महतारी समितियों की सक्रिय भागीदारी से इन केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता और गुणवत्ता भी बढ़ी है।

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के लक्ष्यों को साकार करते हुए आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के सर्वांगीण विकास, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र अब सच में बच्चों की पहली पाठशाला बनकर सशक्त और विकसित भारत की नींव तैयार कर रहे हैं।

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