रायपुर, 9 फरवरी 2026।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर की पहचान बारूद से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और विरासत से है। उन्होंने कहा कि जो बस्तर कभी नक्सल भय के कारण जाना जाता था, वही बस्तर आज सांस्कृतिक उत्सवों और जनभागीदारी का प्रतीक बन रहा है। बस्तर पंडुम 2026 में 55 हजार से अधिक आदिवासियों की सहभागिता इस बदलाव का प्रमाण है।
गृह मंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के माध्यम से खान-पान, लोकनृत्य, गीत, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि सहित 12 विधाओं में आदिवासी संस्कृति को एक मंच मिला है। इस आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस बार पांच नई विधाओं को जोड़कर उत्सव को और व्यापक बनाया गया।
उन्होंने कहा कि बस्तर की कला और संस्कृति केवल एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के तहत बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। आदिवासी जनजातियों के संरक्षण, उनकी कला, शिल्प और परंपराओं को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नक्सलवाद पर बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इस लड़ाई का मूल उद्देश्य आदिवासी किसानों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है। उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की और कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों का सम्मानजनक पुनर्वासन किया जाएगा। वहीं, हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर को आदिवासी क्षेत्रों में सबसे विकसित क्षेत्र बनाया जाएगा। नई पर्यटन गतिविधियों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। बंद पड़े स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र फिर से शुरू किए जाएंगे। गांवों में सड़क, मोबाइल नेटवर्क, पोस्ट ऑफिस और बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
गृह मंत्री ने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। रेल, सिंचाई और बिजली परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब बस्तर में रात के समय सांस्कृतिक गतिविधियां दिखाई देती हैं, जो शांति और भरोसे का संकेत है।
समापन अवसर पर उन्होंने सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि तय समय सीमा में बस्तर को नक्सल मुक्त बनाया जाएगा। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस क्षेत्र की नई पहचान गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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