रायपुर, 22 सितम्बर 2023 – छत्तीसगढ़ में किसानों द्वारा बच की खेती की शुरुआत हो गई है, जो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वनमंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में संभव हुई है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 108 एकड़ में प्रायोगिक तौर पर बच की खेती की जा रही है, जिससे प्रति एकड़ 80 हजार रुपए से 1.00 लाख रुपए तक किसानों को होगी आय।

इस उत्कृष्ट प्रक्रिया के तहत, किसानों को बच की व्यापारिक खेती करने का अवसर मिल रहा है। बच को धान के समान वानिकी खेती के रूप में उत्पादित किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि की संभावना है।

बच की खेती के लिए बैंगलोर का एक गांव टंूकूर देश में प्रथम स्थान पर था, और इसके उत्कृष्ट फायदों को देखते हुए छत्तीसगढ़ के किसानों ने इसे अपनाया है। बच की वर्तमान बाजार कीमत 50 से 60 रुपए प्रति किग्रा होती है, जिससे किसानों को एक एकड़ में 1 लाख से भी अधिक आय प्राप्त होती है।

प्रसंस्करण की विधि: बच की खेती करने के लिए पौधे की चिता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा इसकी प्रयोग नर्सरी के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
बच कृषिकरण तकनीक: इसकी बुआई धान के फसल के समान जुलाई से सितंबर माह तक की जाती है, फसल की कटाई अप्रैल से जून माह के मध्य किया जाता है, और एक एकड़ से लगभग 1 से 3 टन तक उपज का उत्पादन संभावित होता है।
रोपण सामग्री की उपलब्धता: प्रत्येक वर्ष रोपित किए जाने वाले पौधों की उपलब्धता बनी रहती है, जो कि किसानों को इसे पुनः रोपण के लिए उपयोग करने का अवसर देती है।
बच कृषिकरण तकनीक: बच को छत्तीसगढ़ में घोड़बंध या भूतनाशक के नाम से भी जाना जाता है, जिसका उपयोग त्वचा रोग, न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर, पेट संबंधी बिमारी एवं हृदय
रोग संबंधी दवाई बनाने में होता है। इसके उपयोग के कारण इसकी बाजार मांग अत्यधिक है।
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