भारत के खिलाफ अपने दोहरे रवैये से चीन बाज नहीं आ रहा। एक तरफ वो सीमा पर तनाव को कम करने के लिए कमांडर स्तर की बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीमा के पास अपने क्षेत्र में बड़ी सैन्य तैयारी करने के साथ ही पुल और बस्तियां बसाने जैसे उकसाने वाला काम भी कर रहा है। अमेरिकी सेना के प्रशांत क्षेत्र के कमांडिंग जनरल चार्ल्स ए. फ्लिन ने चीन की वामपंथी सरकार के इस अस्थिर और शत्रुतापूर्ण व्यवहार को हिद प्रशांत क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी बताया है।
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच मई, 2020 से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। उसी साल जून में दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान और अधिकारी बलिदान हो गए थे और चीन को भी इससे ज्यादा नुकसान हुआ था, हालांकि उसने मारे गए अपने सैनिकों की सही संख्या कभी नहीं बताई।
पिछले महीने ही यह सामने आया था कि चीन पूर्वी लद्दाख में पेंगोंग झील में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कर रहा है। इसके जरिये वह कम समय में तेजी से साथ अपने सैनिकों को क्षेत्र में तैनात कर सकता है। चीन भारतीय सीमा के पास सड़कों का निर्माण कराने के साथ ही बस्तियां भी बसा रहा है। ऐसा नहीं है कि चीन का सिर्फ भारत के साथ ही सीमा विवाद है। उसका लगभग अपने सभी पड़ोसियों के साथ सीमा क्षेत्र को लेकर टकराव है। हिद प्रशांत क्षेत्र में भी उसका वियतनाम और जापान के साथ सीमा को लेकर टकराव है।
लद्दाख में भारत-सीमा के बीच सीमा पर तनाव के बारे में पूछे जाने पर फ्लिन ने कहा कि उनका मानना है कि चीन की हरकतें आंखें खोलने वाली हैं और चीन सेना की पश्चिमी थिएटर कमान द्वारा बुनियादी ढांचों को निर्माण खतरे की घंटी है। चीन की पश्चिमी थियेटर कमान भारत की सीमा पर तैनात है। फ्लिन ने कहा कि चीन की रक्षा तैयारियों को देखने के बाद कोई भी यह पूछेगा कि इसकी जरूरत क्या है। इसलिए वह भारत-चीन सीमा की स्थिति के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कह सकते हैं, लेकिन यह सवाल तो उठता ही सीमा पर इतनी तैयारियों के पीछे चीन की मंशा क्या है।










