छत्तीसगढ़ में डाग बाइट अब केवल पशु-मानव टकराव नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा संकट बन गया है। आईडीएसपी के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन 425 लोग डाग बाइट का शिकार हो रहे हैं। वर्ष 2023 में कुल 1.14 लाख मामले दर्ज हुए, जो 2024 में बढ़कर 1.35 लाख और 2025 में 1.55 लाख हो गए। तीन साल में लगभग 36% की वृद्धि हुई है। रायपुर जिला इस मामले में सबसे आगे है।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले
विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती घटनाओं के कई कारण हैं। नसबंदी और पशु नियंत्रण कार्यक्रमों की कमी से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। सर्दियों में भूख और गर्मियों में अधिक लोगों के बाहर होने से मुठभेड़ बढ़ जाती है। बच्चे दौड़ते, चिल्लाते या अचानक हरकतें करते हैं, जिससे कुत्ते उत्तेजित हो जाते हैं। बीमार या कमजोर कुत्ते भी छूने पर काट सकते हैं।
सुरक्षा और बचाव के उपाय
डाग बाइट केवल चोट तक सीमित नहीं, बल्कि रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुत्तों से दूरी बनाए रखें और बच्चों को सुरक्षित व्यवहार सिखाएं। समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना सबसे प्रभावी उपाय है। झाड़फूंक या घरेलू नुस्खे घातक साबित हो सकते हैं।










