ज्यादा हंसने और बोलने वाला व्यक्ति अगर चुप हो जाए तो मान लेना वह भीतर से टूट चुका है। ।
जो व्यक्ति सदैव हंसता-खेलता , मुस्कुराता रहता हो। अगर वह अपने स्वभाव से भिन्न हो जाए अर्थात चुप गुमसुम उदास रहने लगे। तो समझना उसके हृदय में एक पीड़ा है , उस पीड़ा ने उसे कमजोर बना दिया है।ऐसे समय में आप उनका सहारा बन कर एक बार फिर से उन्हें इस चुप्पी से बाहर ला सकते हैं।









