गीता में लिखा है क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं। जब तर्क नष्ट होते हैें तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है।
हमें अपने मन को शांत रखते हुए हमेशा सकरात्मान सोच के साथ मन को समझने की कोशिश करनी चाहिए। जीवन में भ्रम के लिए कोई जगह नही छोड़ना चाहिए। अगर हम ऐसा करेंगे तो हमारे आगे बढ़ने के रास्ते और संभावनाएं अपने आप बनेते जाएंगी।









