खुद को माचिस की तिली की तरह मत बनाओ, जो थोड़े से घर्षण से सुलग जाती है, बनाना है तो खुद को शांत सरोवर की तरह बनाओ, जिसमें अगर कोई अंगारा भी फेंके तो वो भी बुझ जाए।
समय कैसा भी हो सैयाम से काम करना चाहिए। आवेश में वो काम भी बिगड़ जाता है जो सही तरह से पूरा हो सकता था। इस लिए जीवन में धैर्य को अत्यंत आवश्यक माना गया है जो हमे सकारात्मक फल देता है।










