रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 (डीएपी) जारी की। इसमें देश को रक्षा उत्पादों का केन्द्र बनाने के उपायों पर जोर दिया गया। नई डीएपी में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और व्यापार में सुगमता पर विशेष जोर दिया गया है। रक्षा उपकरणों की खरीद में लगने वाले समय को कम करने और सरल प्रणाली के तहत तीनों सेनाओं द्वारा पूंजीगत बजट से जरूरी उत्पादों की खरीद पर भी बल दिया गया है।
नई प्रक्रिया में ऑफसेट से संबंधित दिशा-निर्देशों में भी बदलाव किया गया है। इसमें कहा गया है कि सरकारों के बीच और एक विक्रेता के मामले में ऑफसेट का प्रावधान लागू नहीं होगा। ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दी गई है जो ऑफसेट के बजाय भारत में ही उत्पादों के विनिर्माण की पेशकश करेंगी।
बाद में राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि ऑफसेट के दिशा-निर्देश बदले गए हैं और अब स्वयं उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को उन कंपनियों की तुलना में अहमियत दी जाएगी, जो अलग-अलग कलपुर्जे तथा उपकरण बनाती हैं। विशेष प्रोत्साहन देने पर भी जोर दिया गया है। अब तीनों सेनाओं के लिए यह प्रावधान किया गया है कि वे आवश्यक सामान की खरीद निश्चित समय सीमा में पूंजीगत बजट के माध्यम से आसानी से कर सकते हैं।
नई रक्षा खरीद नीति के तहत आने वाले पांच सालों के भीतर भारतीय सेनाएं 2290 करोड़ रुपये उपयोग करेंगी। बैठक में डीएसी की ओर से सेना के लिए 72 हजार अतिरिक्त अमेरिकी सिंगसॉर असॉल्ट राइफल खरीदने को मंजूरी मिल गई। बता दें कि ये लेटेस्ट असॉल्ट राइफल हैं, जिनकी खरीद पर लगभग 780 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सिंह ने कहा कि बॉय (इंडियन आईडीडीएम), मेक 1, मेक 2 , डिजायन और विकास एजेन्सी , आयुध निर्माणी , सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा सामरिक साझेदारी माडल के तहत खरीद की श्रेणी ऐसे भारतीय विक्रेताओं के लिए आरक्षित रहेंगी जो स्वामित्व और निवासी भारतीय नागरिक के नियंत्रण से संबंधित मानदंडों को पूरा करते होंगे। सिंह ने कहा कि डीएपी में नयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति को ध्यान में रखते हुए इसे बढावा देने का प्रावधान किया गया है। इसमें यह ध्यान रखा गया है कि देश में रक्षा उत्पादन का केन्द्र बने जिससे आयात कम हो और निर्यात बढे तथा घरेलू उद्योग भी प्रभावित न हो। लगभग एक वर्ष में तैयार की गई डीएपी के लिए सभी संबंधित पक्षों से सिफारिश और सुझाव लिए गए थे। महानिदेशक (रक्षा खरीद ) अपूर्व चंद्रा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि रक्षा मंत्री ने डीएपी तैयार करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त में एक समिति का गठन किया था। समिति ने गत मार्च में इस बारे में एक मसौदा तैयार किया था जिसे 21 सितम्बर को अंतिम रूप दिया गया था।









