कोरिया। सेवा संकल्प अभियान केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। ग्राम डुमरिया की मुन्नी बाई राजवाड़े ने अपने उद्यम के जरिए इस सोच को नई मिसाल दी है। कभी खेतों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार का भरण-पोषण करने वाली मुन्नी बाई आज सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं। उन्होंने पीएमईजीपी के सहयोग से पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया और अब खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ करीब 10 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।
स्वयं सहायता समूह से मिली उद्यम की राह
मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों से संबंधित प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की जानकारी मिली। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर इसके बारे में विस्तार से जानकारी ली और अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद मुन्नी बाई ने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का फैसला किया। कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण और उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री, बोरवेल सहित प्लांट के लिए जरूरी व्यवस्थाएं तैयार की गईं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने ‘एम हेल्प वॉटर’ नाम से पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया।
एक उद्यम से करीब 10 लोगों को रोजगार
मुन्नी बाई का कारोबार अब केवल उनके परिवार की आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुसार 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है।
प्लांट में पानी की गुणवत्ता जांच, बोतल भरने, पैकेजिंग और अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार के साथ नए कौशल सीखने का अवसर भी मिल रहा है।
गांव से कई जिलों तक पहुंचा कारोबार
मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में उनके प्लांट में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। ‘एम हेल्प वॉटर’ की आपूर्ति बैकुंठपुर के अलावा मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के कई क्षेत्रों में की जा रही है।

महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के अभिसरण से पीएमईजीपी का सहयोग उनके उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ। समूह के माध्यम से मिले मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी ने मुन्नी बाई को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
सरकारी योजनाओं ने सपने को बनाया कारोबार
मुन्नी बाई ने पीएमईजीपी जैसी योजनाओं के माध्यम से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं, मार्गदर्शन और सहयोग से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। आज वह न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने उद्यम के माध्यम से अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
मुन्नी बाई की कहानी यह बताती है कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ जनभागीदारी, संकल्प और मेहनत से जुड़ता है तो उसका प्रभाव केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है।
सेवा संकल्प अभियान की दिखी प्रेरक तस्वीर
सेवा संकल्प अभियान की मूल भावना सेवा के साथ जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और विकसित समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करना है। मुन्नी बाई राजवाड़े की सफलता इसी भावना की एक प्रेरक तस्वीर है। उनका सफर बताता है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ गांव की महिलाएं भी सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं और दूसरों के लिए रोजगार का माध्यम बन सकती हैं।










