27 फरवरी, 2002 को हुए गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में अदालत ने एक और आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस अग्निकांड में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे जिसमें 1,200 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई थी। गुजरात में पंचमहल जिले के गोधरा में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपी रफीक भटुक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। विशेष लोक अभियोजक आरसी कोडेकर ने बताया कि भटुक इस मामले में दोषी ठहराया गया 35वां आरोपित है।
भटुक को फरवरी, 2021 में गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद ही उसके खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ था। पंचमहल पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने उसे गोधरा के ही एक मोहल्ले से गिरफ्तार किया था। इस मामले में आरोपित बनाए जाने के बाद वह गोधरा से फरार हो गया था और यहां लौटने से पहले विभिन्न शहरों में रहा था।
इससे पहले विशेष एसआइटी कोर्ट ने एक मार्च, 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से 11 को मृत्युदंड और 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। गुजरात हाई कोर्ट ने अक्टूबर, 2017 में मृत्युदंड पाए 11 दोषियों की सजा आजीवन कारावास में बदल दी थी, जबकि 20 अन्य की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। बाद में दो अलग-अलग मौकों पर तीन और लोगों को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।










