किसी दूसरे को दिए गए कष्ट से मिलने वाले सुख की उम्र ज्यादा नहीं होती और उसमें वह सुकून महसूस नहीं होता जो किसी की खुशी देखकर मिलने वाले सुख में होता है।
किसी को तकलीफ देना, दुख देना, ताना मरना तो बहुत आसान है पर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना उतना ही कठिन है। हम सोचते हैं कि हमारे ऐसा करने से क्या फर्क पड़ता है लेकिन यह भी सच है की किसी के चेहरे पर एक मुस्कान लाना सो पुण्य करने के बराबर होता है।









