दीपक का जीवन इसलिए वंदनीय नहीं है कि वह जलता है,अपितु इसलिये वंदनीय है कि वह दूसरों के लिए जलता है दूसरों से नहीं जलता है। दूसरों के लिए खुद की परवाह ना करना यह हर किसी के बस की बात नहीं। बहुत कम लोग होते हैं जो अपने से पहले दूसरों के सुख और खुशियों की चिंता करते हैं।
यह दुनिया ऐसी है कि लोग पहले अपना फायदा देखते हैं और बाद में दूसरे की सोचते हैं लेकिन इस सोच से ऊपर उठ कर हमें अपने साथ साथ हमें दूसरों की भी उतनी ही परवाह करनी है जितनी हम अपनी करते हैं।










