राज्यसभा ने देश की नई आपराधिक न्याय प्रणाली वाले तीनों विधेयकों को विपक्षी दलों की गैर मौजूदगी में ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इन विधेयकों को पहले ही पारित कर चुकी है। अब इन पर संसद की मुहर भी लग गई है। विधेयक पर चर्चा में कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि विपक्ष के 46 सदस्य राज्यसभा से निलंबित हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने तीनों विधेयकों, भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता विधेयक और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) पर संयुक्त रूप से पांच घंटे से भी अधिक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इनमें दंड आधारित आपराधिक न्याय प्रणाली को हटा कर उसके स्थान पर न्याय केन्द्रित और भारतीय मूल्यों पर आधारित न्यायिक प्रणाली स्थापित करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों के पारित होने से आपराधिक न्यायिक प्रणाली में एक नये युग की शुरूआत हाेगी जो पूरी तरह भारतीय होगी। इसका मुख्य उद्देश्य पीड़ित को न्याय देना है।
उन्होंने कहा कि इन विधेयकों पर 2019 से विचार विमर्श किया जा रहा था। केवल कानूनों के नाम नहीं बदले गए हैं बल्कि कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। पुराने कानून में भारत के नागरिक के सम्मान और अधिकारों की सुरक्षा के बजाय अंग्रेज अधिकारियों की सुरक्षा की गयी थी। इन कानूनों में भारत के न्याय के दर्शन को जगह दी गयी है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों की आत्मा भी भारतीय है, शरीर भी भारतीय है और सोच भी भारतीय है।
विपक्ष द्वारा संसद के बाहर नए कानूनों की जरूरत पर सवाल उठाये जाने पर कहा कि इसका उद्देश्य स्व शासन लाना है। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के लागू होने के बाद तारीख पर तारीख की परंपरा खत्म हो जायेगी और न्यायिक प्रणाली 21वीं सदी में पहुंच जायेगी। यह सबसे अधिक आधुनिक और प्रौद्योगिकी आधारित न्यायिक प्रणाली होगी। इन कानूनों में राजद्रोह की अवधारणा को बदल कर देशद्रोह में बदला गया है। इसमें देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के खिलाफ बोलने वालों को बख्शा नहीं जायेगा।










